मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

अर्जुन का अहंकार

महाभारत समाप्त हो चुका था।कृष्ण रथ को युध्दभूमि से वाहर ला रहे थे।रथ में वैठा अर्जुन विजय पर फूला नहीं समा रहा था।भीष्म द्रोण कर्ण जैसे महारथियों का विनाश असाधारण बात थी।अर्जुन को लगा यह उसके बाहुवल का प्रताप है।कृष्ण उसके मन की बात ताड़ गए।युध्द्छेत्र से बाहर आने पर कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि बह रथ से उतर जाए। परन्तु गर्वोन्मत्त अर्जुन बोला कि पहले सारथी रथ से उतरता है फिर योध्दा।कृष्ण ने बार-बार अर्जुन से अनुरोध किया परन्तु अर्जुन नहीं माना।क्रुध्द होकर कृष्ण ने अर्जुन को रथ पहले उतरने का आदेश दिया।अर्जुन उतर गया तत्पश्चात कृष्ण जब रथ से उतरे तो रथ में आग लग गयी।देखते ही देखते रथ केवल राख का ढेर रह गया। अर्जुन ने कृष्ण से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा-तुम विजयी होकर भी भीष्मादी के बाणों की छमता नहीं समझते। भीष्म द्रोण कर्ण आदि के अग्निबाणों से यह रथ पहले ही जर्जर हो चुका था।अगर पहले में रथ से उतरता तो तुम रथ के साथ ही भस्म हो जाते।और इस बिजय का कोई अर्थ ना रहता।अर्जुन का सारा अहंकार छनभर में समाप्त हो गया। 

1 टिप्पणी:

  1. महाभारत समाप्त हो चुका था।कृष्ण रथ को युध्दभूमि से वाहर ला रहे थे।रथ में वैठा अर्जुन विजय पर फूला नहीं समा रहा था।भीष्म द्रोण कर्ण जैसे महारथियों का विनाश असाधारण बात थी।अर्जुन को लगा यह उसके बाहुवल का प्रताप है।

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